Indore Water Contamination : इंदौर में दूषित पानी से मौतों का आंकड़ा 8 पहुंचा, कैसे जहर बन गया पानी… कौन है 8 मौतों का असली गुनहगार ?
Indore Water Contamination : ”जल ही जीवन है…” ये नारा आप अक्सर सुनते होंगे, लेकिन अब यही जल कई लोगों के लिए मौत का सबब बन गया। वो भी उस शहर में जिसे देश का सबसे स्वच्छ शहर होने का तमगा मिला हुआ है। बात कर रहे हैं इंदौर की जहाँ दूषित पानी पीने से अब तक 8 लोगों की मौत हो चुकी है और 100 से अधिक लोग शहर के अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती हैं। हालांकि प्रशासन ने अब तक 3 मौतों की ही पुष्टि की है लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स में ये आंकड़ा 8 तक पहुँच चुका है।
हालात ये हैं कि अस्पतालों में जगह नहीं बची है, मेडिकल स्टोर संचालकों का कहना है कि जितनी दवाइयां साल भर में नहीं बिकी उससे अधिक पिछले 4 दिन में बिक चुकी हैं। आखिर देश के सबसे साफ़ शहर का पानी कैसे लोगों के लिए जहर बन गया और इसके लिए आखिर जिम्मेदार कौन हैं आपको इस वीडियो में विस्तार से बताते हैं।
अस्पतालों के बाहर ये भीड़, अपनों की चिंता में ये उदास चेहरे और मन में एक ही सवाल कि आखिर अचानक ये सब क्या हो गया है? ये किसी दर्दभरी फ़िल्म का सीन नहीं बल्कि देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर की हकीकत है। जहाँ भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने अब तक 8 लोगों की जान जा चुकी है तो वहीँ 100 से अधिक लोग शहर के अलग अलग अस्पतालों में भर्ती हैं। इनमे से कई की हालत अभी भी गंभीर बताई जा रही है।
हालांकि, मौतों को लेकर अलग-अलग जानकारी सामने आ रही है। कलेक्टर शिवम वर्मा के अनुसार, 4 लोगों की मौत हुई और 149 लोग अस्पताल में भर्ती हैं।
महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने बताया कि 7 की मौत हुई है। 116 लोग बीमार हैं। जबकि 36 मरीजों को अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया है।
तो वहीँ मंगलवार को मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने तीन लोगों की मौत की पुष्टि की थी। मृतकों में नंदलाल, उर्मिला और तारा कोरी शामिल हैं। इन तीनों की मौत का कारण डायरिया बताया गया था ।
बीते कई दिनों से भागीरथपुरा इलाके में गंदा और बदबूदार पानी सप्लाई की शिकायतें मिल रही थी, वहां के लोकल व्हाट्सअप ग्रुप्स में पानी न पीने के सन्देश भी साझा किये जा रहे थे, बावजूद इसके जिम्मेदार मूकदर्शक बन हाथ पर हाथ धरे बैठे रहे। 25-30 दिसंबर के बीच हालात बिगड़ने शुरू हुए और देखते ही देखते इलाके के 1100 से अधिक लोग बीमार हो गए, और सभी केस उलटी-दस्त और बुखार के थे।
इसके बाद हालात इन ख़राब हो गए कि 100 से अधिक लोगों को अस्पताल में भर्ती करना पड़ा। हुक्मरानों की नीद खुली जब मौतों का आंकड़ा बढ़ने लगा, जब चिताएं जलना शुरू हुई तब प्रशासन हरकत में आया। इलाके में टैंकरों से पानी की सप्लाई शुरू की गई, लोगों के घरों में सप्लाई किए गए पानी के सैंपल भी लिए गए। एक ही इलाके से इतने अधिक मामले सामने आने के बाद भागीरथपुरा में नगर निगम की ड्रेनेज टीम को तैनात किया गया। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि भागीरथपुरा में चौकी से लगे शौचालय के नीचे मुख्य जल लाइन में लीकेज मिला है। आशंका है कि इसी लीकेज के कारण दूषित पानी पाइप लाइन में मिला।
इलाके में नई पानी की लाइन के लिए चार महीने पहले ही टेंडर जारी हो चुके थे। शिकायत के आधार पर अगस्त में हुए इस टेंडर में चार एजेंसियों ने हिस्सा लिया था। 2.40 करोड़ में नई लाइन डालनी थी। जिम्मेदारों ने अब तक टेंडर ही नहीं खोला। टेंडर में गंदे पानी की शिकायतों का जिक्र विशेष तौर पर किया गया था।
अब जब लोगों की मौतें होने लगी तब अफसरों को अपनी जिम्मेदारी याद आई और अब ताबड़तोड़ टेंडर खोले जा रहे हैं। उधर, नर्मदा की मेन लाइन में लीकेज की वजह से क्षेत्र में बीमारी फैली। यह लीकेज पानी की टंकी के पास बने बगीचे के सुविधाघर के नीचे से गुजर रही मेन लाइन में था। मंगलवार को जेसीबी से सुविधाघर तोड़ा तो मेन लाइन में लीकेज मिला। इसके बाद मरम्मत की गई।
हैरानी की बात ये रही कि जब भागीरथपुरा में दूषित पानी से लोगों की मौत हो रही थी, तो नेता आयोजनों में व्यस्त थे।इलाके के पार्षद कमल वाघेला का झूला झूलते वीडियो आया, वहीं जलकार्य विभाग के प्रभारी बबलू शर्मा का एक आयोजन में खाना परोसते फोटो सामने आई। ये तस्वीरें सोशल मीडिया पर अब चर्चा में हैं। और अब जब कई लोगों की जान चली गई तो जांच की बात कर रहे हैं, कार्रवाइया भी हो गई और मरम्मत भी शुरू हो गई है।
सरकार की और से क्या कदम उठाए गए हैं वो भी जान लीजिये ;
CM मोहन यादव ने मृतकों के परिवारजनों को 2-2 लाख रुपये की सहायता राशि देने की घोषणा की है, तो वहीं बीमार मरीजों के इलाज का पूरा खर्च सरकार द्वारा वहन करने का ऐलान किया है। कार्रवाई की बात करें तो जोनल अधिकारी शालिग्राम शितोले और प्रभारी असिस्टेंट इंजीनियर (पीएचई) योगेश जोशी को निलंबित कर दिया है। प्रभारी डिप्टी इंजीनियर (पीएचई) शुभम श्रीवास्तव की सेवा समाप्त कर दी गई है।
- तीन सदस्यों की जांच समिति बनाई गई है।
- इसके अध्यक्ष आईएएस नवजीवन पंवार होंगे।
- समिति में सुपरिटेंडेंट इंजीनियर प्रदीप निगम और मेडिकल कॉलेज के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. शैलेश राय को भी शामिल किया गया है।

मामले में शुरू हुई सियासत
इस मामले में अब राजनीति भी शुरू हो गई है,पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने सरकार पर निशाना साधते हुए इन मौतों को आपराधिक लापरवाही का परिणाम बताया हैं।
आज पूरा इंदौर शोक और पीड़ा की गहरी लहर में डूबा हुआ है।
सरकार की लापरवाही के कारण हमारे अपने लोगों का इस तरह असमय जाना अत्यंत दुखद और असहनीय है। यह केवल मौतें नहीं हैं, बल्कि एक आपराधिक लापरवाही का परिणाम हैं।
मैं इंदौर के प्रभारी मंत्री, नगरीय प्रशासन मंत्री, महापौर, सांसद और… pic.twitter.com/rwyo5dLv1N
— Jitendra (Jitu) Patwari (@jitupatwari) December 31, 2025
तो वहीँ पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा है कि; वर्ष 2025 की समाप्ति मध्य प्रदेश की जनता के लिए दुख और कष्ट की ख़बरों के साथ हो रही है।
दूषित जल से लोगों की मृत्यु का समाचार बताता है कि पेयजल सप्लाई की प्रणाली और व्यवस्था में गंभीर खामियां हैं। ज़हरीली शराब से मृत्यु बताती है कि प्रदेश में अवैध शराब का कारोबार जमकर चल रहा है।
वर्ष 2025 की समाप्ति मध्य प्रदेश की जनता के लिए दुख और कष्ट की ख़बरों के साथ हो रही है।
इंदौर शहर में दूषित पानी पीने से कई लोगों की मृत्यु और जबलपुर में ज़हरीली शराब पीने से एक ही इलाक़े के कई लोगों की पिछले छह महीने में मृत्यु के समाचार बताते हैं कि प्रदेश में क़ानून व्यवस्था… pic.twitter.com/IH8euybmXw
— Kamal Nath (@OfficeOfKNath) December 31, 2025
MP में पिछले दिनों कफ सिरप काण्ड में भी इसी तरह की लापरवाही देखने को मिली थी, जब मासूमों की आउट का आंकड़ा बढ़ा तब जाकर हमारे नेताओं और अधिकारियों की नींद खुली थी और अब इंदौर में भी वही लापरवाही। कहने को इंदौर देश का सबसे स्वच्छ शहर है, स्वच्छता सड़कों पर है, लेकिन पीने का पानी शौचालय से होकर गुजर रहा है। लोग बदबूदार पानी पीते रहे। उल्टी-दस्त शुरू हो गए। नगर निगम की नींद तब खुली, जब मौतों का आंकड़ा बढ़ने लगा।
इस घटना ने हुक्मरानों के बड़े बड़े दावों और वादों की पोल खोल कर रख दी है। और कई सवाल भी खड़े कर दिए हैं कि आखिर कब तक निर्दोष जनता शासन-प्रशासन की लापरवाही की कीमत अपनी जान दे कर चुकाती रहेगी? सवाल ये कि क्यों हर बार हमारी नीद मासूम और निर्दोष लोगों की चीख-पुकार सुनने के बाद खुलती है? हुक्मरानों को जनता का दुःख तब तक क्यों दिखता जब तक चिताओं का धुंआ उनकी आँखों पर न लगे?
इस खबर में अभी के लिए इतना ही इस घटना से जुडी हर छोटी-बड़ी अपडेट हम आप तक पहुंचाते रहेंगे। लेकिन इस मामले पर आप अपनी राय हमें जरूर दीजियेगा। और इस वीडियो को ज्यादा से ज्यादा शेयर भी करियेगा ताकि ये सवाल जिम्मेदारों के कानों तक पहुंचे और उन्हें जवाब देना पड़े।
ताकि कल यही कहानी किसी और मोहल्ले… किसी और शहर में न दोहराई जाए।
