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Umar Khalid Sharjeel Imam Bail Rejected : दिल्ली दंगों के आरोपी उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत सुप्रीम कोर्ट से खारिज, साथ ही दे दिया एक और बड़ा आदेश

Umar Khalid Sharjeel Imam Bail Rejected

Umar Khalid Sharjeel Imam Bail Rejected

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Umar Khalid, Sharjeel Imam Bail Rejected : दिल्ली दंगों के आरोपी उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिका एक बार फिर ख़ारिज गई है। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से इनकार कर दिया। सिर्फ इतना ही नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने यहां तक कहा कि, उमर और शरजील एक साल तक इस मामले में जमानत याचिका दाखिल नहीं कर सकते हैं। हालांकि 5 अन्य आरोपियों को सशर्त ज़मानत दी गई है।

Umar Khalid Sharjeel Imam Bail Rejected : उमर खालिद, शरजील इमाम, गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा उर रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद, दिल्ली दंगों के आरोप में 5 साल 3 महीने से तिहाड़ में बंद थे। दिल्ली हाईकोर्ट में इन्होने ज़मानत याचिका लगाई थी जिसे 2 सितंबर, 2025 को दिल्ली हाईकोर्ट ने ये कहते हुए खारिज ख़ारिज कर दिया था कि ;
प्रारंभिक तौर पर शरजील और उमर की भूमिका गंभीर लग रही है। उन पर सांप्रदायिक आधार पर भड़काऊ भाषण देकर भीड़ को उकसाने के भी आरोप हैं।

इसके बाद इन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट ने 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े मामले में उन्हें गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत जमानत देने से इनकार कर दिया तो उस आदेश को इन्होने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, और अब सुप्रीम कोर्ट ने भी उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिका को ख़ारिज कर दिया है।

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सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए 4 बड़ी बातें कही है;

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अरविंद और जस्टिस एनवी अंजारिया ने फैसला सुनाते हुए कहा –

  1. अभियोजन और सबूतों, दोनों के लिहाज से उमर खालिद और शरजील इमाम की स्थिति अन्य 5 आरोपियों की तुलना में अलग है। कथित अपराधों में ये दोनों मुख्य भूमिका में थे। इन दोनों की ज्यूडिशियल कस्टडी की अवधि भले ही लंबी रही हो, लेकिन यह न तो संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन करती है और न ही संबंधित कानूनों के तहत लगे वैधानिक प्रतिबंधों को निष्प्रभावी करती है।
  2. बहस के दौरान आरोपित पक्ष को और से लंबे समय तक जेल में रहने और संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत स्वतंत्रता के बारे में दलीलें दी गईं। जिस पर कोर्ट ने कहा ;
    कोर्ट संविधान और कानून के बीच अमूर्त तुलना नहीं कर रहा है। अनुच्छेद 21 संवैधानिक व्यवस्था में एक खास जगह रखता है। लेकिन ट्रायल से पहले जेल को सजा नहीं माना जा सकता। और इसलिए स्वतंत्रता से वंचित करना मनमाना आचरण नहीं माना जाएगा।
  3. कोर्ट ने कहा ; UAPA एक खास कानून के तौर पर उन शर्तों के बारे में एक कानूनी फैसला दिखाता है जिनके आधार पर ट्रायल से पहले जमानत दी जा सकती है। लेकिन राज्य की सुरक्षा और अखंडता से जुड़े अपराधों का आरोप लगाने वाले मुकदमों में देरी तुरुप का पत्ता नहीं हो सकती।
  4. कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि 5 जिन 5 आरोपियों गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, मोहम्मद समीर खान, शादाब अहमद और शिफाउर रहमान को जमानत मिली है, उस जमानत से उनके खिलाफ लगे आरोपों में कोई नरमी नहीं आती। उन्हें 12 शर्तों के अधीन जमानत पर रिहा किया जाएगा। और यदि शर्तों का पालन नहीं किया गया तो ट्रायल कोर्ट आरोपियों की सुनवाई के बाद जमानत रद्द करने के लिए स्वतंत्र होगा।

 

Umar Khalid Sharjeel Imam Bail Rejected

 

सुप्रीम कोर्ट में आरोपियों ने ये भी दलील दी थी कि मामले में लंबे समय से सुनवाई शुरू नहीं हुई है और ट्रायल शुरू होने की संभावना भी कम है। साथ ही यह भी कहा गया कि वे 5 साल से अधिक समय से जेल में हैं, लेकिन अब तक उनके खिलाफ दंगे भड़काने से जुड़ा कोई ठोस सबूत ना ही सामने नहीं आया है और ना आएगा।

इससे पहले, सुप्रीम कोर्ट ने 10 दिसंबर को सभी पक्षों की विस्तृत दलीलें सुनी थी और फैसला सुरक्षित रख लिया था।

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दिल्ली पुलिस ने इनके खिलाफ क्या दलीलें रखीं ?

Umar Khalid Sharjeel Imam Bail Rejected : दिल्ली पुलिस ने 2020 दंगों के आरोपियों की जमानत याचिकाओं का विरोध किया था। पुलिस ने इन्हे दिल्ली में दंगे भड़काने का मुख्य साजिशकर्ता बताया था। पुलिस ने दलील दी कि, सुनवाई में देरी के लिए आरोपी खुद जिम्मेदार हैं। अगर आरोपियों ने मदद की होती तो ट्रायल दो साल में पूरा किया जा सकता था।

पुलिस के दूसरी दलील ये रखी कि ,दिल्ली में जो दंगे हुए वो अचानक नहीं हुए थे। बल्कि यह पैन-इंडिया स्तर यानी पूरे भारत में एक साथ रची गई साजिश थीं, जिनका मकसद ‘सत्ता परिवर्तन’ और ‘आर्थिक दबाव’ बनाना था। पुलिस के अनुसार, CAA को मुद्दा बनाकर ‘शांतिपूर्ण विरोध’ के नाम पर कट्टरपंथीकरण का जरिया बनाया गया।

दिल्ली पुलिस ने जमानत के विरोध में दलील पेश करते हुए ये भी कहा कि साजिश को तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की भारत यात्रा के समय अंजाम देने की योजना थी, ताकि अंतरराष्ट्रीय मीडिया का ध्यान भारत की खींचा जा सके और नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के मुद्दे को वैश्विक स्तर पर उठाया जा सके।

और इन सब दलीलों और आरोपित पक्ष के तर्कों को सुनने के बाद दिल्ली पुलिस ने ये फैसला सुनाया है।

संक्षिप्त में आपको इस केस और दिल्ली दंगों की टाइमलाइन भी बता देते हैं –

और आज इस पर फैसला सुनाया है। फैसला आने के बाद भाजपा ने एक प्रेस कान्फ्रेंस कर के इसे देश के टुकड़े-टुकड़े गैंग के लिए बड़ा दु:खद और दर्दनाक बताया है।

 

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