MP Atithi Vidwan latest news : मध्य प्रदेश में भी लागू होगी हरियाणा मॉडल जैसी अतिथि विद्वान नीति!
MP Atithi Vidwan latest news : मध्यप्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने अतिथि विद्वानों को लेकर बड़ा और राहत भरा बयान दिया है। मंत्री ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश में कार्यरत अतिथि विद्वानों को पद से नहीं हटाया जाएगा, बल्कि उनके भविष्य को सुरक्षित करने के लिए हरियाणा पॉलिसी के अध्ययन के बाद नई नीति लाई जाएगी। अब इसके बाद सवाल ये है कि मंत्री के बयान के क्या मायने हैं? अतिथि विद्वानों को इसका क्या फायदा हो सकता है? हरियाणा पॉलिसी में क्या हैं और क्या बदलाव हो सकते हैं जानिए इस खास रिपोर्ट में।
कौन हैं अतिथि विद्वान ?
अतिथि विद्वान वे शिक्षक होते हैं, जिन्हें स्थायी प्रोफेसर की कमी के चलते कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में अस्थायी तौर पर नियुक्त किया जाता है। इनकी नियुक्ति सत्रवार होती है और इन्हें लेक्चर या मानदेय के आधार पर भुगतान किया जाता है। मध्य प्रदेश में लाखों अतिथि विद्वान हैं जो स्नातक और स्नातकोत्तर कक्षाओं में पढ़ा रहे हैं, और कई वर्षों से लगातार अपनी सेवाएं दे रहे हैं। प्रदेश में स्थायी भर्ती न होने से जो शिक्षकों कमी है अतिथि विद्वान उसे पूरा कर रहे हैं और शैक्षणिक व्यवस्था का आधार बने हुए हैं।
क्या है हरियाणा पॉलिसी ?
हरियाणा सरकार ने अतिथि शिक्षकों के लिए एक स्ट्रक्चर्ड नीति बनाई है, जिसके तहत उन्हे कई प्रकार की सुविधाएं और सहूलियत मिलती हैं। Haryana’s guest teacher policy के अनुसार;
- अनुभवी अतिथि विद्वानों को हटाया नहीं जाता
- उन्हें मेरिट और अनुभव के आधार पर प्राथमिकता मिलती है
- जब तक स्थायी भर्ती नहीं होती, तब तक शिक्षण कार्य जारी रहता है
- शैक्षणिक योग्यता,अनुभव,UGC मानदंड को महत्व दिया जाता है
- इस नीति का उद्देश्य है कि छात्रों की पढ़ाई प्रभावित न हो और शिक्षकों को असुरक्षा में न रखा जाए
MP में हरियाणा मॉडल कैसे होगा लागू ?
मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि हर राज्य की अपनी परिस्थितियों के अनुसार नीति होती है, लेकिन हरियाणा में लागू मॉडल को देखकर मध्यप्रदेश भी अपने शिक्षकों के लिए जल्द नई पॉलिसी बनाएगा…
उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा है कि मध्यप्रदेश में अतिथि विद्वानों के हितों को देखते हुए हरियाणा पॉलिसी का गंभीर अध्ययन किया जा रहा है और MP की परिस्थितियों के अनुसार नई नीति का ड्रॉफ्ट तैयार किया जाएगा।
मंत्री इंदर सिंह परमार ने बताया कि;
- हरियाणा पॉलिसी का गंभीर अध्ययन किया जा रहा है…
- मध्य प्रदेश की परिस्थितियों के अनुसार नई नीति का ड्राफ्ट तैयार होगा….
- अतिथि विद्वानों को अचानक हटाने की कोई योजना नहीं…
- अनुभव और सेवा अवधि के आधार पर समावेश का रास्ता निकाला जाएगा…
- हम भी अपने शिक्षकों के लिए जल्द नई पॉलिसी लाएंगे…
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हालांकि उच्च शिक्षा मंत्री ने अतिथि विद्वानों के नियमितीकरण को लेकर कोई सीधा ऐलान नहीं किया, लेकिन सरकार के संकेत साफ हैं कि उन्हें व्यवस्था से बाहर नहीं किया जाएगा। अतिथि विद्वान फिलहाल उच्च शिक्षा प्रणाली का अहम हिस्सा बने रहेंगे। जब तक स्थायी शिक्षकों की भर्ती पूरी नहीं होती, तब तक उनकी सेवाएं जारी रखने की मंशा सरकार ने जाहिर की है।
यह फैसला इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि प्रदेश की उच्च शिक्षा व्यवस्था का बड़ा हिस्सा अतिथि विद्वानों पर निर्भर है। कुल मिलाकर, हरियाणा मॉडल की तर्ज पर नई नीति लाने के संकेतों से प्रदेश के अतिथि विद्वानों को राहत मिली है, अब सबकी नजरें सरकार के अगले फैसले और आधिकारिक नीति के ऐलान पर टिकी हैं।
