MP NEWS : छिंदवाड़ा मध्यप्रदेश का दक्षिणी जिला है, और इस जिले के एक छोटे से इलाके से ऐसी घटना निकलकर सामने आई है जिसने समाज के उन लोगों के मुंह पर एक जोरदार तमाचा जड़ा है,जो लोग धर्म के नाम पर समाज में सांप्रदायिक दंगे भड़काने का कार्य करते है|
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MP NEWS : दरअसल यह घटना मोहखेड़ विकासखंड के माउ गांव की है जहां करीब डेढ़ साल की मासूम बच्ची जिदंगी और मौत के बीच की जंग लड़ रही थी, उस बच्ची की की साँसें लगभग थम चुकी थीं… परिजनों के चेहरे पर चिंता की लकीरे स्पष्ट तौर पर दिखाई पड़ रही थी….बच्ची की मां की उम्मीद धीरे धीरे ढ़ीली पड़ती जा रही थी पर ठीक उसी वक्त एक डॉक्टर फ़रिश्ता बनकर उनके सामने आया, नाम था — डॉ. सोयन खान।
6 मिनट की जंग…जिंदगी और मौत के बीच का फासला :
मामले के मुताबिक, बच्ची का ऑक्सीजन लेवल अचानक गिरकर सिर्फ 65 प्रतिशत रह गया था। परिवार घबराया हुआ था, चीख-पुकार मची थी और हर कोई उम्मीद छोड़ता दिख रहा था। तभी डॉक्टर सोयन खान ने तुरंत बच्ची को सीपीआर देना शुरू किया। गौर करने वाली बात यह थी कि डॉक्टर उस समय रोज़े से थे,पानी की एक बूंद तक नहीं पी थी , फिर भी उन्होंने बिना एक सेकंड गंवाए मासूम की जान बचाने के लिए अपनी पूरी ताकत झोक दी डॉक्टर करीब 6 मिनट तक लगातार सीपीआर देते रहे। आसपास खड़े लोग सांस रोके बस एक ही दुआ कर रहे थे “या अल्लाह, इस बच्ची को बचा लेना।”
और इसी के दरम्यान गूंज उठी मासूम की रोने की आवाज…
कुछ देर बाद बच्ची की हल्की-हल्की हरकत शुरू हुई…और फिर रोने की आवाज आई।
उस पल परिवार की आंखों में आंसू थे, डॉक्टर की आंखों में राहत, और गांव में खुशी की लहर फैल गई।
वीडियो वायरल, डॉक्टर के हौसले को सलाम :
सीपीआर देते हुए डॉक्टर का वीडियो तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जहां हर कोई डॉक्टर सोयन खान की तारीफ कर रहा है, और करे भी क्यों न जहां दुनिया में नफरतें फैलाने की कोशिशें होती रहती हैं, वहीं यह वीडियो बताता है कि इंसानियत किसी धर्म से
कुछ मीडिया रोज़ “मुस्लिम खतरा” बेचता है,
और एक मुस्लिम डॉक्टर रोज़े में भी 6 मिनट CPR देकर "एक हिंदू बच्ची को जिंदगी लौटा देता है।
नैरेटिव टूट गया।
झूठ धराशायी हुआ।
इंसानियत फिर जीत गई।
डॉ. सोयन खान—आपने TRP की नफरत को जमीन पर धूल चटा दी।#StopHate#ExposeMedia#DrSoyanKhan pic.twitter.com/G1I7E8HLM8— विजय कुमार गौतम (@VijayGa77938671) February 25, 2026
मुस्लिम समुदाय के लिए गर्व का क्षण :
रोज़े की हालत में भी अपनी थकान,कमजोरी और भूख-प्यास की परवाह किए बिना एक मां-बाप की गोद उजड़ने से बचाना…कितनी गर्व की बात है …..यह डॉक्टर उस परिवार के लिए डॉक्टर नही बल्कि एक फरिश्ते बन कर आया था
यह सिर्फ एक डॉक्टर का फर्ज नहीं, बल्कि मुस्लिम समुदाय की उस परंपरा का हिस्सा है जिसमें इंसानियत पहले आती है।
डॉ. सोयन खान का यह कदम दिखाता है कि
रोज़ा सिर्फ भूख और प्यास का नाम नहीं…
बल्कि निस्वार्थ सेवा, सब्र, और मानवता की रक्षा का संकल्प है।
गांव में जश्न जैसा माहौल :
बच्ची के सुरक्षित होने के बाद माउ गांव में ऐसा माहौल बना जैसे किसी त्योहार की खुशियां लौट आई हों। परिवार ने डॉक्टर को दुआएं दीं। ग्रामीणों ने कहा
“आज हमने भगवान को डॉक्टर के हाथों काम करते हुए देखा।”
ऐसे वक्त में जब समाज को जोड़ने और भाईचारे की ज़रूरत है, यह घटना एक संदेश देती है—
दर्द का रंग धर्म नहीं देखता, और मदद करने वाला इंसान कभी अकेला नहीं होता।
और इस घटना के बाद मुझे अपनी स्कूल के दिनो में पढ़ी एक कविता याद आती है
“हिंदु मुस्लिम सिक्ख ईसाई
आपस में सब भाई – भाई”
रिपोर्ट – विजय गौतम