MP NEWS : एक ऐसा गांव जहां मोबाइल चार्ज के लिए देने पड़ते है 20 रुपए !

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MP NEWS :  जरा सोचिए ? आज़ादी के 79 साल हो चुके हैं , देश चांद पर पहुंच चुका है, सरकार अरबो रुपए के विज्ञापन छाप रही है, हर मंच पर विकास की गंगा बहाए जाने के दावे किए जा रहे हैं, पर इन सबके बीच आज हम आपको ऐसी तस्वीरें दिखाने जा रहे है जो किसी वेब सीरीज या फिल्म का सीन नहीं, बल्कि मध्यप्रदेश के एक ग्रामीण इलाकों की कड़वी सच्चाई है ..15 अगस्त 2003 को गुना जिले से अलग होकर अशोकनगर मध्यप्रदेश के 41 वें नंबर का एक स्वतंत्र जिला बना..यह जिला सिंध और बेतवा नदी के ठीक बीचों बीच स्थित है और इसी ज़िले से महज 45 किलोमीटर दूर एक ऐसा गांव… जिसे देखकर यकीन करना मुश्किल है कि हम 2026 में खड़े हैं या 1947 में !

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MP NEWS : ईसागढ़ तहसील की ग्राम पंचायत डेंगा मटिया देवेंद्र पूरा के लोग आज़ादी के 79 साल बाद भी अंधेरे में जिंदगी काटने को मजबूर हैं और वजह केवल एक-  “प्रशासन का अमानवीय, शर्मनाक, और गैरजिम्मेदाराना रवैया।”

जी हाँ , दशकों से 45 परिवार लालटेन–चिमनी की रोशनी में जीवन काट रहे हैं , बिजली नहीं…पानी नहीं…सड़क नहीं…सरकारी सुविधाएं नहीं… और प्रशासन? 

सिर्फ बैठकों में वादे… भाषणों में आश्वासन… और जमीन पर ZERO काम,  बच्चों की पढ़ाई दिन के उजाले तक सीमित…मोबाइल चार्जिंग के लिए 7 किलोमीटर चलकर जाना पड़ता है…हर चार्ज पर 20 रुपये देने पड़ते हैं…लेकिन प्रशासन की आंखें आज भी बंद हैं।

 

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ग्रामीण वोट का बहिष्कार कर चुके… धरना–प्रदर्शन कर चुके…जनप्रतिनिधियों से लेकर बड़े अफसरों के दरवाज़े खटखटा चुके…पर यहां सुनने वाला कोई नहीं, क्योकि प्रशासन की कुर्सी पर बैठे लोगों के लिए ये गांव,  गांव नहीं  “सिर्फ एक पिछड़ा आंकड़ा है|”

सच्चाई साफ है – यह अंधेरा प्राकृतिक नही यह अंधेरा शासन की विफलता ,लापरवाही और अपराध से पैदा हुआ है|

सवाल है कि- 

  • क्या सरकार इन गांवों को सिर्फ चुनावी भाषणों में याद रखती है?
  • क्या विकास के दावे कागज़ तक ही सीमित हैं?
  •  क्या 79 साल बाद भी एक गांव तक बिजली न पहुँचना प्रशासन की नाकामी नहीं?
  • किससे जवाब लिया जाए?
  • कौन है जिम्मेदार इस अंधेरे का?
सत्ता के गलियारों मे बैठे जिम्मेदार लोग शायद यह भूल चुके हैं कि अगर इन ग्रामीणों के सब्र का बांध टूटा तो उसकी गूंज विधानसभा की चौखट तक जरुर पहुंचेगी|

रिपोर्ट – विजय गौतम 

 

 

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